बहुमत नहीं, इसलिए फ्लोर टेस्ट से भागी कमलनाथ सरकार

पार्टी के 106 विधायकों के साथ राज्यपाल से मिलने के बाद वरिष्ठ नेताओं ने कहा
भोपाल। प्रदेश की कमलनाथ सरकार अल्पमत की सरकार है। यह सरकार बहुमत खो चुकी है और इसे सत्ता में बने रहने का कोई अधिकार नहीं है। कमलनाथ सरकार को यह बात भलीभांति पता है कि उसके पास बहुमत नहीं है, इसीलिये यह सरकार कोई भी बहाना बनाकर फ्लोर टेस्ट से भाग रही है, बचने की कोशिश कर रही है। यह बात भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने सोमवार को राज्यपाल महोदय से भेंट के उपरांत कही। राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं प्रदेश संगठन प्रभारी डॉ. विनय सहस्त्रबुद्धे, पूर्व मुख्यमंत्री श्री शिवराजसिंह चैहान, प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद श्री विष्णुदत्त शर्मा, नेता प्रतिपक्ष श्री गोपाल भार्गव, मुख्य सचेतक डॉ. नरोत्तम मिश्रा एवं पूर्व मंत्री श्री भूपेंद्रसिंह पार्टी के सभी विधायकों के साथ सोमवार को राज्यपाल श्री लालजी टंडन से मिले और लोकतंत्र की रक्षा के लिये उनसे हस्तक्षेप करने की मांग की। पार्टी नेताओं ने राज्यपाल महोदय को 106 विधायकों की सूची एवं उनके शपथ पत्र भी सौंपे।  



सत्ता में रहने का संवैधानिक अधिकार खो चुकी कमलनाथ सरकारः चैहान
 पूर्व मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चैहान ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि कमलनाथ जी की सरकार अल्पमत में है  और बहुमत खो चुकी है। इसीलिए महामहिम राज्यपाल महादेय ने सरकार को फ्लोर टेस्ट कराने का आदेश दिया था। अगर बहुमत होता तो फ्लोर टेस्ट में क्या दिक्कत थी? लेकिन मुख्यमंत्री जानते हैं कि उनकी सरकार अल्पमत की सरकार है और इसीलिए राज्यपाल महोदय के आदेश का पालन नहीं किया। सामना करने की बजाय सरकार रणछोड़दास बन गई और सत्र स्थगित करके भाग गई। उन्होंने कहा कि अब इस सरकार को एक पल भी सत्ता में रहने का संवैधानिक अधिकार नहीं है। श्री चैहान ने कहा कि कमलनाथ सरकार ने हार के डर से कोरोना का बहाना बनाकर विधानसभा का सत्र स्थगित कर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसा करके कमलनाथ सरकार ने लोकतंत्र को लज्जित और अपमानित करने का काम किया है। श्री चैहान ने कहा कि कमलनाथ सरकार टाइम काटू सरकार है,  केवल समय काट रही है। इस अल्पमत की सरकार को ट्रांसफर और पोसिं्टग का अधिकार नहीं है, लेकिन यह सरकार निर्लज्जतापूर्वक तबादले कर रही है। श्री चैहान ने कहा कि हमने राज्यपाल महोदय से जल्द से जल्द फ्लोर टेस्ट कराने की प्रार्थना की है, ताकि अल्पमत की सरकार विदा हो और संविधान की रक्षा करते हुए जिस पार्टी का बहुमत हो उसे सरकार चलाने का मौका मिले।


सुप्रीम कोर्ट में लगाई याचिका, मैदान में भी करेंगे विरोधः विष्णुदत्त शर्मा
 पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व सांसद श्री विष्णुदत्त शर्मा ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि भारतीय जनता पार्टी प्रदेश में किसी भी कीमत पर राज्यपाल महोदय के आदेश की अवहेलना नहीं होने देगी। श्री शर्मा ने कहा कि फ्लोर टेस्ट से बचने के लिये कमलनाथ सरकार ने जिस तरह की अवैधानिक हथकंडेबाजी की है,  लोकतंत्र की हत्या का जो प्रयास किया गया है, इसके विरोध में भारतीय जनता पार्टी मैदान में खड़ी है। इसके खिलाफ हमने माननीय सुप्रीम कोर्ट में भी याचिका लगाई है, जिस पर शीघ्र सुनवाई होगी। श्री शर्मा ने कहा कि पार्टी के सभी विधायकों ने राजभवन पहुंचकर महामहिम राज्यपाल महोदय को सशरीर अपनी उपस्थिति बताकर यह कहा है कि मध्यप्रदेश में लोकतांत्रिक तरीके से हमारे संवैधानिक अधिकारों की रक्षा की जाए।


राज्यपाल के पत्र के बावजूद सदन स्थगित करना गैरकानूनीः गोपाल भार्गव
 विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष श्री गोपाल भार्गव ने इस अवसर पर कहा कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार अल्पमत में है। उन्होंने कहा कि राज्यपाल महोदय ने 14 मार्च को सरकार को फ्लोर टेस्ट कराने के लिए पत्र भेजा था, जिसमें 16 मार्च को राज्यपाल महोदय के अभिभाषण के तुरंत बाद फ्लोर टेस्ट कराने का आदेश था। उसके बाद भी इस सरकार ने जिस तरह से फ्लोर टेस्ट न कराते हुए सदन को 26 तारीख तक स्थगित किया है, वह गैरकानूनी है। उन्होंने कहा कि हमारे 106 विधायकों की सूची और उनके शपथ-पत्र विधानसभा अध्यक्ष एवं राज्यपाल महोदय को दिये हैं और उन्हें बताया है कि बहुमत हमारे साथ है।  


लोकतंत्र की धज्जियां उड़ा रही कमलनाथ सरकारः डॉ. नरोत्तम मिश्रा
 विधानसभा में मुख्य सचेतक डॉ. नरोत्तम मिश्रा ने इस अवसर पर कहा कि मध्यप्रदेश की कांग्रेस सरकार प्रदेश के इतिहास की सबसे अराजक और भ्रष्टतम सरकार है। जिस तरह से यह सरकार लोकतांत्रिक मूल्यों की खुलेआम धज्जियां उड़ा रही है, उससे इस सरकार की नीतियां उजागर होती हैं। डॉ. मिश्रा ने कहा कि हमने पार्टी के सभी विधायकों के साथ राज्यपाल महोदय से भेंट करके यह निवेदन किया है कि प्रदेश में कानून का पालन हो, क्योंकि इस सरकार ने कोरोना के नाम पर सदन स्थगित करने का जो काम किया है, वह विधायकों के संवैधानिक अधिकारों और लोकतंत्र पर अत्याचार करने के समान है।