किसानों के लिए भारी पड़ सकता है 21 दिन का लॉक डाउन 


kamlesh pandey
छतरपुर। कोरोना वायरस से नागरिकों की जान की हिफाजत करने लागू किया गया 21 दिन का लॉक डाउन किसानों के लिए भारी पड़ सकता है। भले ही इस लॉक डाउन से कोरोना के खतरे से बचा सकता है लेकिन इसी दौरान किसानों के खेतों में खड़ी फसल को काटने की मजबूरी भी है जिसके लिए किसानों को कई बार आवश्यकता के कारण घरों से निकलना पड़ता है। जिला प्रशासन ने अब तक किसानों के लिए कोई ठोस गाइड लाइन जारी नही की जिसके के कारण किसानों को बाहर निकलते वक्त पुलिस की सख्ती से जूझना पड़ रहा है। 
 उल्लेखनीय है जिले में इन दिनों गेहूं,जवा,मटर,चना और राई की फसल काटी जा रही है। हालांकि की राज्य और केंद्र सरकार के निर्देश पर फसल काटने वाली हार्वेस्टर मशीनों की आवाजाही को लॉक डाउन से मुक्त रखा गया है लेकिन फिर भी फसल कटाई के दौरान ऐसे कई काम होते हैं जिनके लिए किसानों को घरों से बाहर निकलना पड़ता है किंतु किसानों के लिए जिला प्रसाशन द्वारा कोई स्पष्ट गाइडलाइन न होने के कारण किसानों को परेशान होना पड़ रहा है।
इन जरूरतों के वक्त क्या करे किसान,अब तक साफ नही
1- किसानों को खेतों तक थ्रेसर ले जाने,फसलों को लादने वाहन का इंतजाम करना है इसके लिए किसानों को शहर आना पड़ता है।
2- थ्रेसर के लिए डीजल की आवश्यकता पड़ती है जिसके लिए किसानों को डीजल खरीदने पेट्रोल पंप जाना पड़ता है।
3-कटाई के लिए मजदूर तलाशने अथवा हार्वेस्टर खोजने निकलना पड़ता है जिसके लिए किसान दो दिन में मिलने वाली 4 घण्टे की छूट पर निर्भर नही रह सकता
4-कई किसान जो शहरों में रहते हैं लेकिन खेती गाँव मे करते हैं उन्हें कटाई के लिए प्रतिदिन खेतों पर आना जाना पड़ता है वे क्या करें?
5- कटाई के लिए कृषि यंत्रों को जरूरत पड़ती है इनकी दुकाने खोलने के लिए प्रतिदिन छूट दी गई है लेकिन कृषि यंत्र खरीदने के लिए आने वाले किसानों को पुलिस परेशान कर रही है।
छूट के बाद भी दूध वालों पर डंडे चला रही पुलिस
किसानों के अलावा आवश्यक सेवाओं की आपूर्ति वाले कुछ वर्ग भी पुलिस की वेवजह सख्ती से जूझ रहे हैं। कलेक्टर शीलेन्द्र सिंह ने अपने पिछले आदेश में दूध वालों को प्रतिदिन सुबह 7 से 10 तक दूध वितरण करने की छूट दी है इसके बाबजूद कुछ हिस्सों में दूध वालों पर लाठी चलाये जाने की खबरें सामने आ रही है। विगत रोज ही छत्रसाल चौक,सिविल लाइन के समीप पुलिस ने कई दूध वालों से दूध वितरण की परमीशन दिखाने के नाम पर उन्हें आधे घण्टे तक परेशान किया जबकि दूध वालों के लिए किसी तरह का कोई परमीशन पत्र रखने प्रावधान ही नही बनाया गया है।
रिमोट एरिया के दुकानदार क्या करें
छतरपुर जिला मुख्यालय के बाहर अनेक छोटे नगरों में दैनिक जीवन की उपयोगी वस्तुएं खत्म होने लगी हैं मसलन राशन, किराना,दवाएं आदि। इन छोटे शहरों के दुकानदारों को इन चीजों की थोक खरीद के लिए जिला मुख्यालय आना पड़ता है। फिलहाल दो दिन में सिर्फ एक दिन वह भी चार घण्टे के लिए ही लॉक डाउन में छूट दी जा रही है। यह दुकानदार कई बार चार घण्टों में अपनी खरीद कर बापिस नही लौट पाते तो पुलिस उनसे सख्ती दिखा रही है। जिला प्रशासन ने इनके लिए भी कोई स्पष्ट आदेश जारी नही किया है।
इनका कहना
नोट: इस बॉक्स मे फोटो क्रमांक 13 लगाएं।
धारा 144 के आदेश में ही किसानों को छूट दिए जाने का आदेश शामिल था। किसान अपनी फसलों को काट रहे हैं।कहीं कोई समस्या नही है। पुलिसकर्मियों को भी निर्देशित किया गया है कि सोशल डिस्टेंसिंग के पैमाने जांच करें लेकिन किसानों को निकलने की छूट देते रहें।
शीलेन्द्र सिंह, कलेक्टर छतरपुर