संकटकाल में भोपाल डिपो की महिला महिला ट्रेन ड्रायवर नहीं चला रही ट्रेन

देष भर से उलट है भोपाल की कहानी, कई ट्रेन सह चालकों का गिर रहा मनोबल


भोपाल। संकट की इस घड़ी में देश भर की महिला ट्रेन ड्रायवर जी-जान से काम पर लगी हुई हैं, लेकिन भोपाल डिविजन की 15 महिला ट्रेन ड्रायवर 23 मार्च से ऑन डिटेल होने के बाद भी ट्रेनें नहीं चलवाई जा रही हैं। इसका कारण कोरोना वायरस (कोविड-19) नहीं, बल्कि रेलवे के कुछ स्थानीय नेता हैं।


जिन्होंने महिलाओं को कोरोना वायसर का हवाला देते हुए काम न करने को कहा है। जिसके कारण भोपाल डिपो के सह चलाकों (पुरूषों) में रोष व्याप्त है। कोविड-19 का खतरा पुरूष सह-चालकों में भी है, लेकिन रेल प्रशासन के नियमों का हवाला देकर पुरूषों की ड्यूटी लगाई जा रही है।
हालांकि इनमें से कुछ महिलाओं ने 25 मार्च तक काम किया, लेकिन स्थानीय नेताओं के धमकाने पर उन्होंने भी अन्य महिला साथियों की तरह घर पर रहना उचित समझा। जबकि सागर, झांसी, जबलपुर में महिला ट्रेन ड्रायवर अपनी सेवाएं दे रही हैं। ऐसे में उन पुरूष ट्रेन ड्रायवरों का मनोबल गिर रहा है, जिन्हें नियमानुसार 16 घंटे का भी अवकाश नहीं मिल रहा है।
23 मार्च को देश में लॉकडाउन के साथ ही सवारी गाड़ियों का संचालन बंद कर दिया गया था, देश में जरूरी वस्तुओं की आपूर्ति न रूके इसलिए मालगाड़ियों का संचालन जारी रखा गया। इसके लिए सवारी गाड़ियों के ड्रायवरों को मालवाहक गाड़ियों की जिम्मेदारी सौंपी गई है।


एक तथ्य यह भी
नाम न देने की शर्त पर एक महिला ट्रेन ड्रायवर ने बताया कि यह नेता उन पुरूष ड्रायवरों की ड्यूटी जानबूझकर लगवा रहे हैं, जिनसे उनका व्यक्तिगत अथवा किसी अन्य प्रकार का मतभेद रहा है। रही बात महिलाओं के काम करने की तो हम सभी संकट की इस घड़ी में देश और रेलवे के लिए अधिक काम के लिए भी तैयार हैं, लेकिन इसे लिंग भेद का नाम दिया जाना गलत है। एक अन्य महिला ड्रायवर ने कहा कि जब रेलवे हॉस्पिटल और रेलवे सुरक्षा बल में कार्यरत महिला कर्मचारी अपनी सेवाएं दे रही हैं, तो इस समय तो देश को हमारी ज्यादा जरूरत हैं। मैं इसके लिए तैयार हूं, लेकिन ड्यूटी ही नहीं लगाई जा रही है।


यह है नियम
नियमानुसार कोई ड्रायवर अपने नियत स्थान से गंतव्य स्थान तक ट्रेन ले जाता है, और नियत स्थान पर वापस लाता है तो उसे 16 घंटे का रेस्ट दिया जाता है। इसके बाद ही उसकी ड्यूटी लगाई जा सकती है। कोविड-19 के चलते सवारी गाड़ियों के ड्रायवरों को मालवाहक गाड़ियों के संचालन में लगाया गया है। ऐसे में इनकी सेवाएं ड्यूटी रोस्टर के हिसाब से नहीं, बल्कि इंजार्च व दंबगों के कहने पर लगाई व निरस्त की जा रही है। जबकि महिला सह-चालकों को 23 मार्च के बाद ड्यूटी ही नहीं लगाई गई है और वह रेलवे अकाउंट पर 23 तारीख से ऑन डिटेल हैं। वहीं पुरूष सह-चालकों की लॉकडाउन से अभी तक के समय में सभी पुरूष सह-चालक 4 से 5 बार ड्यूटी कर चुके हैं। 

सबका एक ही जबाव मैं कुछ नहीं कह सकता
मैं इस संबंध में अधिकृत व्यक्ति नहीं हूं, आप रेलवे पीआरओ से बात करलें। मीडिया से बात करने के लिए वही अधिकृत हैं। मुझे इस विषय में कोई जानकारी नहीं है।


आदित्य लेघा, वरिष्ठ मंडल विद्युत अभियंता, भोपाल मंडल
उम्रदराज और महिलाओं को ड्यूटी पर नहीं लिया जाए, ऐसा है। लेकिन इसको लेकर किसी प्रकार का कोई आदेश, निर्देश हैं अथवा नहीं यह रेलवे पीआरओ ही बता पाएंगे।
राकेश चौबे, डिपो इंचार्ज, क्रू लॉबी भोपाल


इस विषय में मैं संबंधित अधिकारियों से चर्चा करके बात करता हूं।
सिद्धकी, पीआरओ, रेलवे भोपाल