विदेश से लौटे युवक के घर जांच करने पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ अभद्रता

तहसीलदार ने मकान किया सील, अभद्रता करने वाले पिता-पुत्र को थाने भेजा, बिना कार्रवाई छोड़ा


khemraj mourya
शिवपुरी। खनियांधाना में कल दोपहर साउदी अरब से लौटे एक युवक मोहम्मद रियाज के घर जांच करने पहुंची स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ परिवार के लोगों ने अभद्रता कर दी और जानकारी देने से इंकार कर दिया। इसके बाद जब स्वास्थ्य विभाग की टीम ने पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को घटना की सूचना दी तो मौके पर टीआई और तहसीलदार दीपक शुक्ला पहुंच गए। जिन्होंने उक्त मकान को सील कर अब्दुल वासिद और हाजी शफी मोहम्मद को हिरासत में लेकर थाने ले आए। बताया जाता है कि राजनैतिक दबाव आने के बाद पुलिस ने दोनों पिता-पुत्रों को छोड़ दिया। जिसकी पुष्टि अब्दुल वासिद ने की है। 
जानकारी के अनुसार आंगनबाड़ी कार्यकर्ता रामलली कोली और स्वास्थ्य विभाग की एएनएम व अन्य सदस्य बीएमओ एके झांसियां के निर्देश पर रेतगोई मोहल्ला में रहने वाले हाजी शफी मोहम्मद के घर पर जांच करने पहुंचे थे। स्वास्थ्य विभाग के पास सूचना आई थी कि हाजी शफी मोहम्मद का पुत्र मोहम्मद रियाज साउदी अरब से वापस आया था। दोपहर के समय जब टीम वहां पहुंची तो हाजी शफी और उनके दूसरे पुत्र अब्दुल वासिद ने टीम को जानकारी देने से इंकार कर दिया और इसी दौरान पड़ोस में रहने वाला एक युवक मुस्तकीन पुत्र हासमभाटी का विवाद आंगनबाड़ी कार्यकर्ता रामलली कोली से हो गया। जिसकी सूचना स्वास्थ्य विभाग की टीम ने बीएमओ एके झांसियां और तहसीलदार दीपक शुक्ला को दी, जो मौके पर पहुंचे। बताया जाता है कि मुस्तकीन अधिकारियों के आने के बाद भी विवाद कर रहा था। इसी दौरान तहसीलदार श्री शुक्ला ने उसकी बाइक अपने कब्जे में ले ली, तो वह मौके से भाग गया। बाद में तहसीलदार ने मौके पर टीआई सुधीर कुशवाह को बुलाकर दोनों पिता-पुत्र हाजी शफी मोहम्मद और अब्दुल वासिद को उनके सुपुर्द कर दिया। इसके बाद उनके मकान को बाहर से सील कर दिया गया और  घर के बाहर नोटिस भी चस्पा किया गया। पुलिस दोनों को लेकर थाने पहुंची। लेकिन कुछ समय बाद ही पुलिस ने दोनों पिता-पुत्र को बिना कार्रवाई के छोड़ दिया। पुलिस की हिरासत में आए अब्दुल वासिद ने मोबाइल पर चर्चा करते हुए बताया कि उनके द्वारा स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ कोई अभद्रता नहीं की गई थी। लेकिन तहसीलदार श्री शुक्ला ने जबरन उन्हें पुलिस के सुपुर्द कर दिया। इसके बाद उसने विधायक केपी सिंह से चर्चा की। जिनकी बात उसने तहसीलदार दीपक शुक्ला से कराई और इसके बाद उन्हें छोड़ दिया गया। बाद में उन्हें शाम के समय घर में बंद कर तहसीलदार ने  पुन: उनके मकान को सील कर दिया। अब परिवार के सभी सदस्य घर में ही बंद हैं। 
टीआई, तहसीलदार और बीएमओ के अलग-अलग बयान 
कार्रवाई करने पहुंचे तहसीलदार दीपक शुक्ला के साथ बीएमओ एके झांसिया और टीआई सुधीर सिंह कुशवाह पहुंचे थे। लेकिन तीनों ही अधिकारियों से जब चर्चा की गई तो उन सभी के बयान अलग-अलग थे। टीआई सुधीर सिंह कुशवाह ने तो इस पूरी घटना की जानकारी न होने की बात कही। जबकि तहसीलदार दीपक शुक्ला का कहना था कि दोनों पिता पुत्र को उन्होंने टीआई सुधीर कुशवाह के सुपुर्द कर थाने भेज दिया था। जिन पर कार्रवाई की जा रही है। जबकि बीएमओ एके झांसिया का कहना था कि दोनों पिता पुत्र ने स्वास्थ्य विभाग की टीम के साथ अभद्रता की थी और उन्हें थाने ले जाया गया था। लेकिन वहां दोनों पिता पुत्र ने माफी मांगी थी और कहा था कि वह आगे से कभी ऐसा नहीं करेंगे। साथ ही एसडीएम द्वारा बुलाई गई धर्मगुरूओं की बैठक में भी धर्मगुरूओं ने भी उन्हें क्षमा करने की बात कही थी। जिस कारण उन्हें घर भेज दिया। हालांकि पूरे परिवार को निर्देशित किया है कि वह होम क्वारैंटाईन में ही रहें और उनके घर के बाहर नोटिस भी चस्पा किया गया है। 
तहसीलदार तो मुझे फंसाना चाहते थे लेकिन विधायक केपी सिंह ने उन्हें बचा लिया : अब्दुल वासिद
अब्दुल वासिद का कहना है कि तहसीलदार दीपक शुक्ला ने तो मुझे फसाने की पूरी योजना बना ली थी। उन्होंने थाने में पुलिस के समक्ष बताया था कि दोनों पिता पुत्रों ने मिलकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ता के कपड़े फाड़ दिए थे और टीम के अन्य सदस्यों के साथ अभद्रता की थी। जबकि उसने और उसके पिता ने किसी तरह से भी टीम के सदस्यों के साथ अभद्रता नहीं की। वहां तो एक पड़ोसी ने आकर पूरा माहौल खराब कर दिया था। लेकिन तहसीलदार उनकी बात को मानने तैयार नहीं थे। तब उसने पिछोर विधायक केपी सिंह से बात की। इसके बाद तहसीलदार की बात विधायक साहब से कराई। तब कहीं जाकर वह और उसके पिता थाने से छूटे।
इनका कहना है- 
मेरी ड्यूटी कोविड-19 के सर्वे के लिए लगी हुई थी और मैं अपनी सहयोगियों के साथ रेतगोई मोहल्ला गई थी। जहां एक परिवार के लोगों ने जानकारी देने से इंकार कर दिया। जब मैंने उनसे कहा कि वह घर से बाहर न आए खिड़की से ही सारी जानकारी दे दें। इसी बात पर वह मुझसे अभद्रता करने लगे। बाद में सर को मैंने पूरी घटना के बारे में बताया। इसके बाद उन्हें थाने ले जाया गया और वहां उन्होंने सारी जानकारी दे दी। 
रामलली कोली, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, खनियांधाना