प्रतिबंध के बाद भी जमकर बिक रहा गुटखा, नहीं हो रही कार्रवाई

- दुकानदारों द्वारा ब्लैक में बेची जा रहीं गोल्डमोहर सहित अन्य तरह के गुटखा की पाउच। 


awdhesh dandotia
मुरैना। तम्बाकू पर प्रतिबंध के बाद भी शहर में गुटखा की जमकर बिक्री हो रही है। गोल्डमोहर, राजश्री, सहित अन्य तरह के पाउच चोरी-छिपे ब्लेक किए जा रहे हैं। दस रुपए वाला पाउच 40 रुपए व 20 रुपए वाला पाउच 70 से 80 रुपए तक का ग्राहकों को बेचा जा रहा है। तम्बाकू के शौकीन इस ऊंची रेट पर भी गुटखा के पाउच खरीद रहे हैं। लेकिन खाद्य सुरक्षा विभाग इस ओर कोई कार्रवाई नहीं कर रहा। सूत्र बताते हैं कि गुटखा के थोक विक्रेताओं द्वारा खाद्य सुरक्षा विभाग को मोटी रकम दी जा रही है और यही राशि कार्रवाई में बाधा बन गई है।
गोल्डमोहर, राजश्री, रजनीगंधा-तुलसी, पीजी सहित अन्य गुटखा के थोक दुकानदारों ने गुटखा रखने का इंतजाम शहर में ऐसे स्थानों पर किया है जहां लोगों की नजर न आ सके और चोरी छिपे यहीं से महंगे दामों में गुटखा के पैकेट खेरीज विक्रेताओं को दिए जा रहे हैं और यह खेरीज विक्रेता ऊंचे दामों पर गुटखा के पाउचों की बिक्री की कर रहे हैं। सूत्रों की मानें तो कुछ पुलिस कर्मचारी भी गुटखा की ऊंचे दामों की बिक्री में पैसा कमा रहे हैं। वह कुछ लोगों को कार्रवाई की धमकी देकर उनसे पैसा ऐंठ लेते हैं। इससे दुकानदार कार्रवाई से बच जाते हैं और कोरोना आपदा के इस समय वह गुटखा के माध्यम से जमकर पैसा कमा रहे हैं। 


उत्तरप्रदेश से आ रहे गुटखा पाउच के पैकेट : 
सूत्रों बताते हैं कि गोल्डमोहर व राजश्री गुटखा उत्तरप्रदेश से मुरैना में आ रहा है। सूत्रों का कहना है कि सब्जी व अन्य तरह के सामान लेकर आने वाले ट्रकों पर गुटखा के पैकेट रख दिए जाते हैं और थोक दुकानदार इन्हीं ट्रकों से गुटखा के पैकेट लेकर अपने गोदाम में पहुंचा देेते हैं। इस काम में पुलिस का भी सहयोग थोक दुकानदारों द्वारा लिया जाता है। पंसारी बाजार में गोल्डमोहर की एजेन्सी है जिसके द्वारा जमकर गोल्डमोहर की कालाबाजारी की जा रही है। यह बात खाद्य सुरक्षा विभाग के अधिकारी भी जानते हैं लेकिन वह कार्रवाई नहीं कर रहे। वहीं राजश्री का गोदाम हनुमान चौराहे के पास है। लेकिन इन दिनों एजेन्सी संचालक ने किसी अन्यत्र स्थान पर राजश्री का स्टॉक कर रखा है। यदि संंबंधित महकमा स्टिंग ऑपरेशन करे तो इनके द्वारा की जा रही कालाबाजारी खुलकर सामने आएगी और कार्रवाई हो सकेगी। लेकिन खाद्य सुरक्षा विभाग इस गोरखधंधे में हिस्सेदार बना हुआ है।